
Description
क़हर में हम धूँड़ने चले, अपने फ़रिश्तों क़ो;
राम ने मुँह बंद किये यह जहान दे दीया।
राम राम भाई लोग

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क़हर में हम धूँड़ने चले, अपने फ़रिश्तों क़ो;
राम ने मुँह बंद किये यह जहान दे दीया।
राम राम भाई लोग
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